साधक साधना में उपयोग की सामग्री (नैवेद्य, भोग) तथा अपना भोजन स्वयं तैयार करें। अनुष्ठान के दौरान दिनचर्या नियमित रखें और आलस्य से बचें। ब्रह्मचर्य व्रत का पूर्ण रूप से पालन करें। अपने गुरु एवं परमात्मा पर पूर्ण विश्वास और श्रद्धा रखें। जप के समय क्रोध, लड़ाई, चिंता आदि से https://dallasiboaj.digiblogbox.com/63843303/top-latest-five-shanivar-urban-news